पंकज त्रिपाठी को जब मुश्किल से देखने को मिलता था ‘पैसा’, बोले- ‘नहीं लगता कि फैंसी कार खरीद पाऊंगा’

पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) को अपने बचपन में बड़ी मुश्किल से पैसा देखने को मिलता था. एक्टर ने एक ताजा इंटरव्यू में बताया कि वे कभी भी भारी लोन, फैंसी कार या बड़ा घर नहीं खरीद पाएंगे. दर्शक उन्हें ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘रावण’, ‘दबंग 2’, ‘सिंघम रिटर्न्स’, ‘फुकरे’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘न्यूटन’, ‘स्त्री’, ‘लूडो’, ‘मिमी’, ‘गुंजन सक्सेना’ और ‘बच्चन पांडे’ में अभिनय करते हुए देख चुके हैं.

पंकज को वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ से काफी लोकप्रियता मिली, जिसमें उन्होंने लीड रोल निभाया है. टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में, पंकज ने कहा, ‘मैं एक हंबल बैकग्राउंड से आया हूं. मैं और मेरी पत्नी भले ही कई सालों से मुंबई में हैं, पर हमने कभी भी चमक-दमक वाली लाइफ स्टाइल की जरूरत महसूस नहीं की. मुझे नहीं लगता कि मैं कभी भी एक फैंसी कार या एक बड़ा घर खरीदने के लिए भारी लोन ले सकता हूं.’

पंकज त्रिपाठी: खुश रहने के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं
उन्होंने यह भी बताया, ‘मैं एक किसान का बेटा हूं और बिहार के एक दूर-दराज के गांव में पला-बढ़ा हूं. हम मुश्किल से पैसा देख पाते थे. मेरे माता-पिता के पास घर पर टीवी भी नहीं था. मैं पैसे की कीमत समझते हुए बड़ा हुआ हूं. मुझे नहीं लगता कि भौतिक संपन्नता को लेकर मेरा नजरिया जल्द ही कभी बदलेगा. मेरा मानना ​​​​है कि जीवन में खुश रहने के लिए, आपको ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं है. मेरे पास जो कुछ है, उससे मैं हमेशा खुश रहने की कोशिश करता हूं.’

‘केबीसी 13’ में संघर्ष के दिनों को किया था बयां
पंकज ने पिछले साल ‘कौन बनेगा करोड़पति 13’ के एक एपिसोड में होस्ट अमिताभ बच्चन के साथ अपने स्ट्रगल के दिनों को शेयर किया था. उन्होंने कहा था, ‘मैं साल 2004 में मुंबई आया था और 2012 में ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में काम किया था. कोई नहीं जानता था कि मैं आठ सालों तक क्या कर रहा था. जब लोग मुझसे पूछते हैं, ‘आपके संघर्ष के दिन कैसे थे’, तब मुझे एहसास होता है कि ‘ओह, वे मेरे स्ट्रगल के दिन थे?’

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पंकज को संघर्ष के दिनों में पत्नी का मिला साथ
पंकज त्रिपाठी ने आगे कहा था, ‘उस समय, मुझे नहीं पता था कि यह एक कठिन दौर था. मुझे कठिनाई का एहसास नहीं था, क्योंकि मेरी पत्नी बच्चों को पढ़ाती थी, हमारी जरूरतें सीमित थीं, हम एक छोटे से घर में रहते थे और वे कमाती थीं, इसलिए मैं आसानी से रहता था. पत्नी की वजह से, मुझे अपने संघर्ष के दिनों में, अंधेरी स्टेशन पर सोना नहीं पड़ा.’

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